शनिवार, 17 जुलाई 2010

कभी तो जनोगी ?

कहो अम्मा, कैसी हो ? आज शनिवार है। पापा के साथ बिजी हो। कल सन्डे है। यानी कल भी फुर्सत नहीं होगी। सोमवार को शायद.... जी हाँ, शायद सोमवार को आप इसे पढ़ लें....या जब भी पढ़ें , एक बात ज़रूर बताइयेगा.... अब जबकि वैज्ञानिकों ने यह तय कर दिया है कि पहले मुर्गी आई थी अंडा बाद में आया , अंडा क्या करे ? शर्म से डूब मरे ?
सवाल शायद हजम नहीं हुआ ! कोई बात नहीं। दूसरा सवाल सुनो। (पढो)। मैं कहीं नहीं हूँ, लेकिन हूँ। हूँ न ? अज़न्मी हूँ, पर कभी तो जनोगी ? जनोगी न ? मुझे उस पल का इंतजार है जब मैं भैया की गोद में खेलूंगी। क्या हुआ ? परेशानहो गयीं ? चलो इसे भी छोडो। कुछ लोगों के मुकद्दर में केवल खयाली जन्म होता है। सागर के ख्यालों में तो मैं पैदा हो ही चुकी हूँ। ये क्या कम है ?
बस एक सवाल और ! प्यार क्या है ? वो जो तुम पा से करती हो ? या वो जो मैं सागर से करती हूँ ? या जो पा बड़ी माँ से करते हैं ? या सागर अपने मैं से करते हैं ? कभी सोचा है ?
मम्मा, आप अकेले होती हैं तो क्या सोचती हैं ? किसके बारे में (सागर के अलावा) सबसे ज्यादा सोचती हो ? तुम्हें सबसे ज्यादा नफरत (सागर के अलावा) किस से है ? ज़रूर बताना। लव यू।

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