सोमवार, 31 मई 2010

पिया का घर प्यारा लगे !

बाबुल मेरो नैहर छूटो ही जाय........! मम्मा जा रही हो, हमे भूल मत जाना। बेशक पिया का घर प्यारा लगे पर जहाँ बचपन बीता वो जगह कभी नहीं भूल सकतीं। भैया को ननिहाल कि बहुत यद् आएगी। आपके घर में तो कोई उसे घंटो तक गोद में लेकर खिला भी नहीं सकता। खैर ! तुमने आज पूरे दिन बात नहीं की। चलो माफ़ किया तुम्हारे पिया जो आये थे। मम्मा, अब नई जिंदगी शुरू करो.....अपनी जिंदगी.....अपनी तरह की जिंदगी... जिसको सुहाए, आ जाये....नहीं सुहाए, भाड़ में जाये। करोगी ? नहीं करोगी.......मुझे पता है तुम ऐसा कर ही नहीं सकतीं। कोई बात नहीं तुम जिस में खुश रहो मैं तो उसी में राज़ी... आई लव यूं टू मच मम्मा.....!

2 टिप्‍पणियां:

  1. आई लव यूं टू मच मम्मा.....!

    or pure parivar ko


    achha he


    aap ne mujhe didi ki bidai ka time yad dila diya jab us se jayada me ro raha tha unki bidai par

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